इब्न अल‑हैथम (Ibn al‑Haytham) मध्ययुगीन इस्लामी स्वर्ण युग के एक बहुआयामी वैज्ञानिक थे जिनका कार्य optics, गणित और खगोलशास्त्र में मौलिक रहा। उन्हें आधुनिक optics और प्रयोगात्मक विज्ञान के अग्रदूतों में गिना जाता है.
जीवन और पृष्ठभूमि
जन्म और मृत्यु: इब्न अल‑हैथम का जन्म लगभग 965 CE (बासरा, वर्तमान इराक) में हुआ और उनका निधन लगभग 1040 CE (काहिरा) में हुआ — वे लगभग 75 वर्ष के रहे.
शैक्षिक और व्यावसायिक क्षेत्र: उन्होंने गणित, भौतिकी और खगोलशास्त्र में काम किया; विशेषकर प्रकाश और दृष्टि (vision) के अध्ययन में उनका योगदान सर्वाधिक प्रसिद्ध है.
Kitāb al‑Manāẓir — Book of Optics
उनकी प्रमुख कृति Kitāb al‑Manāẓir (Book of Optics) सात खंडों में है और इसमें प्रकाश, परावर्तन (reflection), अपवर्तन (refraction), और दृष्टि‑प्रक्रिया पर विस्तृत प्रयोगात्मक विश्लेषण दिया गया है.
इब्न अल‑हैथम ने यह सिद्ध किया कि vision तब होता है जब प्रकाश आँख में प्रवेश करता है — यह intromission theory प्राचीन ग्रीक विचारों के विपरीत एक निर्णायक बदलाव था.
वैज्ञानिक पद्धति और प्रयोग
इब्न अल‑हैथम ने अवलोकन, परिकल्पना और नियंत्रित प्रयोगों (controlled experiments) के माध्यम से सिद्धांतों का परीक्षण करने पर ज़ोर दिया — यह आज हम जिस scientific method के रूप में जानते हैं, उसके प्रारंभिक रूपों में से एक माना जाता है.
उन्होंने सिद्धांतों को गणितीय रूप में व्यक्त किया और प्रयोगों से सत्यापित किया, जिससे उनके काम का प्रभाव केवल सिद्धांत तक सीमित न रहकर प्रयोगात्मक विज्ञान की दिशा में बढ़ा.
प्रमुख तकनीकी योगदान
- दृष्टि का सिद्धांत (Theory of Vision): उन्होंने स्पष्ट किया कि आँख में प्रवेश करने वाला प्रकाश ही देखने का कारण है, न कि आँख से बाहर निकलने वाली किरणें.
- परावर्तन और अपवर्तन का विश्लेषण: दर्पण और लेंस के व्यवहार का गणितीय और प्रयोगात्मक अध्ययन किया; उन्होंने spherical aberration जैसी समस्याओं की पहचान की.
- Alhazen’s problem: उन्होंने वह गणितीय प्रश्न विकसित और संबोधित किया जिसे बाद में Alhazen’s problem कहा गया — दर्पण पर वह बिंदु खोजने का प्रश्न जहाँ से परावर्तित किरण आँख तक पहुँचे; यह समस्या ऑप्टिकल गणित में महत्वपूर्ण मानी जाती है.
- दृष्टि‑धारणा और मनोविज्ञान: perception के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर उनके विचारों का कला और परिप्रेक्ष्य (perspective) के अध्ययन पर भी असर पड़ा.
प्रभाव और विरासत
इब्न अल‑हैथम के ग्रंथों का लैटिन में अनुवाद यूरोप पहुँचा और Renaissance के वैज्ञानिकों पर गहरा प्रभाव डाला; उनके विचारों ने बाद के वैज्ञानिकों को प्रयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया.
इतिहासकार और वैज्ञानिक उन्हें अक्सर “father of optics” और प्रयोगात्मक विज्ञान के अग्रदूत के रूप में याद करते हैं — उनका काम आज भी optics और विज्ञान के इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है.
निष्कर्ष
इब्न अल‑हैथम ने सिद्ध किया कि सैद्धान्तिक विचार तभी टिकते हैं जब उन्हें नियंत्रित प्रयोगों से परखा जाए। उनका Book of Optics न केवल प्रकाश और दृष्टि के ज्ञान को आगे बढ़ाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि observation और experiment कैसे विज्ञान को बदल देते हैं। उनकी विधियाँ और निष्कर्ष आज भी optics और scientific methodology के अध्ययन में केंद्रीय स्थान रखते हैं.
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